बेहया!

इतनी शिद्दत से तो मैंने अपने बोर्ड़ के रिजल्ट का भी इंतज़ार नहीं किया था , जितना इस किताब के छपने का किया है। २४ दिसंबर को बिटिया के ८वें जन्मदिन की लंच पार्टी चल रही थी कि हमारे संपादक शैलेश जी का मैसेज आया, किताब का pre order link था, कुछ देर कुछ भी समझ नहीं आया.. इतने दिनों से इसी की राह देख रहे थे और अचानक मिले मैसेज से जैसे एकदम सन्न रह गए। ❤ उफ़ !! ख़ुशी दुगनी हो गयी। पूरे २ साल का वक़्त लगा इस किताब को सही और परंपरागत प्रकाशन तक पहुँचने में, फिर एक और साल लगा संपादन प्रक्रिया के पूरा होने में!  2018-2020 🙂

हर किताब में कई लोगों की मेहनत और दुआएं शामिल होती हैं और शामिल होता है एक पूरा परिवार जो कभी निराश नहीं होने देता ❤ । परिवार के अलवा कुछ दोस्त और शुभचिंतक, जो हर हाल में आपको फिनिशिंग लाइन तक पहुंचाने का बीड़ा उठा लेते हैं।  ऐसे ही शुभचिंतक और अग्रज हैं , अनंत विजय जी जिन्होंने न केवल हिंदी भाषा में किताब लिखने के लिए उत्साह बढ़ाया बल्कि अपनी व्यस्त दिनचर्या में से समय निकाल कर बेहया, की प्रस्तावना भी लिखी , आपका बहुत आभार सर 🙏! इस कहानी को हिन्द युग्म तक पहुंचाने में दिव्य प्रकाश दुबे जी का बड़ा योगदान है। उन्होंने न सिर्फ उनका ईमेल दिया बल्कि खुद ईमेल लिख कर उनसे परिचय भी कराया। शुक्रिया दिव्य , आपकी वजह से ये किताब आज अपने मूर्तरूप में पहुंची है  

वैसे दोस्तों को शुक्रिया कहें इतने तमीज़दार नहीं हैं हम, लेकिन इस किताब की एडिटिंग और हिंदी टाइपिंग के लिए मेरे साथ दिन रात एक करने के लिए आप (you know who) को दिल से धन्यवाद, आपके बिना एडिटंग संभव नहीं थी! दिन भर नौकरी और फिर देर रात तक किताब की एडिटिंग ये सिर्फ आप ही कर सकते थे.. 🤗🤗

और कृति बघेल, तुम जैसा फ़ॉलोअप तो मेरा भी नहीं है, इतनी डांट खाने पर भी रोज़ किताब के लिए अपडेट लेना, पूरे ३ साल.. कमाल हो तुम भी 🤗🤗


किताब के बारे में :- हमारे देश में शादी और प्यार पर बॉलीवुड की बड़ी छाप है। लेकिन असल ज़िन्दगी सुनहरे  पर्दे  की कहानियों से बहुत अलग होती है। कई बार राम-रावण अलग अलग नहीं होते बल्कि वक़्त और हालत के साथ एक ही व्यक्ति किरदार बदलता रहता है। 

बेहया, कहानी है सिया और यश की कामयाब और खूबसूरत ज़िन्दगी की, ये कहानी है रूढ़िवादी सोच से उपजे शक़ और बंधनों की, ये कहानी है उत्पीड़न और डर के साये में जीने वाले मुस्कुराते और कामयाब चेहरों की। ये कहानी है समाज के सामने सशक्त दिखने वालों की मजबूरी और उदारता का जामा ओढ़े हैवानों की भी!

बार बार कहने पर, देखने पर भी जो बातें जीवनसाथी नहीं समझ पाते; कैसे वही दर्द और टीस एक अनजान व्यक्ति बस आवाज़ सुनकर समझ जाता है? कैसे मुस्कुराते चेहरे के पीछे की उदासी को वो पल भर में भांप लेता है? आत्माओं के कनेक्शन से उपजे कुछ खूबसूरत रिश्ते समाज के बंधनो से परे होते हैं। बेहया कहानी है सिया और अभिज्ञान के इसी अनकहे, अनजान और अनगढ़े रिश्ते की.  

उम्मीद है इस किताब को आपका भरपूर प्यार और स्नेह मिलेगा। आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार रहेगा। 
https://amzn.to/3mSMzAA

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