“है ज्ञान की ये गंगा…. सदियों से भी पुरानी ….”

​​​​​आमतौर पर फेसबुक पर ज्यादा सक्रिय नहीं हूँ. ज्यादा देर बिता देते हैं तो गुस्सा आ जाता है. किसी को अनफ्रेंड कर देते हैं, किसी को अनफॉलो. ताकि लोगों की ज्ञान भरी पोस्ट्स से बच जाएं.  आज तो हद  ही हो गयी एक दोस्त को व्हाट्स एप्प पर उसकी पोस्ट के लिए समझाने लगे।  फिर लगा  कंट्रोल विनीता।  जैसे तैसे वहां ख़तम किया तब तक एक स्टूडेंट की पोस्ट पर लम्बा कमेंट लिख दिया। पोस्ट में ज्यादा कुछ नहीं था , बस यही शेयर किया था. 


UC means Upper caste. नया क्या है ? इस तरह के blames तो रोज़ झेलते हैं।  हमेशा इग्नोर करते हैं, पर कभी कभी माता आ जाती है हम पर। कतई इन्टॉलरेंट हुए जा रहे हैं। आम तौर पर इग्नोर ही करते हैं , कसम से! फिस और घर से फुर्सत नहीं होती है ना।  थोड़ा टाइम होता है तो किताब पूरी करने में जुट जाते हैं। पर जनता अभी तो वैसे भी घर में बंद हैं, डाटा सस्ता है. दिन भर ज्ञान दे रहे हैं लोग, कसम से खून खौल जाता है कभी कभी।  

  • जो नहीं है उसके गुण गाओ ​
  • जो कर रहे हैं उनकी कमी बताओ 
  • तरीका, नीयत , तैयारी कहीं न कहीं तो मिल ही जाएगी कमी। 
  • एयरलिफ्ट क्यों नहीं कराया.
  • अच्छा करा दिया तो क्यों करा दिया. 
  • कर्फ्यू क्यों नहीं लगाया. 
  • कर्फ्यू क्यों लगाया 
  • कनाडा का प्रधानमंत्री देखो 
  • यहाँ प्लानिंग में कमी है 
  • पैकेज कम है 
  • लोग पैदल जा रहे हैं , उन्हें बसें दो 
  • बसें क्यों की, गाँव गाँव करोना फैलेगा 

धोबी और गधे वाली कहानी है जैसे।  याद होगी ना , बचपन में थी नैतिक शिक्षा की किताब में। ज्ञान दो, गाली दो।  डर फैलाओ, और फिर बोलै, कहा था न ! 

एक ज़माने में जैसे क्रिकेट भर दिन भर लोग ज्ञान देते थे न, कि सचिन कैसे खेले , द्रविड़ को क्या करना चाहिए। . बस वही सब मोहल्ले और चौक से उठ कर, आके फेसबुक पर शुरू है. जेब से एक रुपया निकलता नहीं है।  किसी की मदद के नाम पर बस बातें करा लो।  जो लोग अच्छे पदों पर होकर भी कभी किसी की नौकरी लगने में मदद नहीं करते। काम करा के पूरे पैसे नहीं देते। फ्री की दारू और खैनी के लिए अपने काम से भी दग़ाबाज़ी कर लें ; वो लोग बताते हैं की क्या करें, कैसे करें. और अगर किया भी तो ऐसे नहीं वैसे क्यों नहीं किया भाई. बारात के फूफा की तरह बस खाओ और गरियाओ वाला हाल है। 

जो करो इन फेसबुक मठाधीशों से पूछ कर करो।  भाईसाब कितने लोगों की मदद की आपने? एक बिस्कुट भी देते हैं तो फोटो खींच के डाल देने वाले ज्ञान देंगे की मूर्ती और मंदिर नहीं अस्पताल ज़रूरी हैं।  भैया इस जंग में मंदिर का पैसा भी शामिल है और मूर्ती की कमाई भी। जो काम कर रहे हैं अगर उसमें हाथ नहीं बंटा सकते तो कम  से कम अपने काम से काम रखो बे!  गजब है भाई!


लोग ज्ञान देते हैं , और मेरा बैकग्राउंड म्यूजिक शुरू हो जाता है ” है ज्ञान की ये गंगा…. सदियों से भी पुरानी …. ” नहीं चाहिए ज्ञान भैया , सबके पास बहुत है, बक्श दो भाईसाब। अपने अपने पाले में बैठ कर,  अपनी अपनी बात।  सबके अपने अपने भक्त और चमचे, अपनी अपनी डफली अपने अपने राग।  और उस पर हर बेसुरे, वाहियात व्यक्ति को दाद देने वालों की भीड़।  दूसरे  की ना  सुननी  न समझनी है कभी।  फायदा ऐसे ज्ञान का? 


भाइयों और बहनों एक चीज़ होती है सकारात्मकता नाम तो सुना होगा? २१ दिन मैडिटेशन करके थोड़े पॉजिटिव हो जाओ यार। थोड़ा काम खुद भी कर लो। हर वक़्त बैठ कर ज्ञान देने का धंधा अच्छा है, पर खुल के करो तो ज्ञानी बाबा और माताओं को भक्त और पैसा खूब मिलेगा (कृपया केस स्टडी पढ़ लें राधे माँ और पाखंडी बाबाओं को लाठी भी मिल रही है आज कल के बुरे दिनों में )    

वैसे मेरे घर में भी २ दिन से आटा नहीं था। आस पास के स्टोर्स पर भी सप्लाई नहीं थी।  दो दोस्तों से पूछा कि क्या किया जाए, एक दोस्त पूरे दिन की शिफ्ट चैनल में करके कल रात को आटा देने आया।  बिना मांगे मदद की। ना उस व्यक्ति ने फोटो लगायी #HelpedFriend , न ही मैंने लम्बी से पोस्ट लिखी शुक्रिया अदा करने के लिए. क्योंकि वो thank you सामने ही बोल दिया गया , Facebook announcement  नहीं करना था। 

PS* I am a non social person, बिलकुल लिखना नहीं चाहते है। पर क्या करें घर में हैं. ये गुस्सा कहीं और निकले इससे अच्छा है लिख दें।

*चुनकर गब्बर वाली फोटो लगायी है अपनी.

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