बच्चियों को कोख में मार देना बेहतर है!

प्रिय प्रधानमंत्री जी,

सेक्स प्रीडिटरमिनेशन टेस्ट को लीगल कर दीजिए और जो लोग अपनी मर्जी से घर में बेटियां नहीं होने देना चाहते हैं, उन्हें ऐसा करने दीजिए। मैं समझ सकती हूं कि आखिर क्यों विदेशी आक्रांताओं के आने के बाद, भारत में पहले पर्दा प्रथा और फिर बाल विवाह होने लगे… जौहर होने लगे , फिर भी जब आताताईयों से लोग अपनी बेटियों को नहीं बचा पाते थे, तो उन्होंने बेटियां जन्म लेते ही मारना शुरू कर दिया होगा। यह फीमेल फिटीसाइट यूं ही नहीं शुरू हुआ होगा ना !

बच्चियों के साथ जो दरिंदगी आज हो रही है उसे देखकर रूह कांप जाती है। देश आजाद है, अब तो कोई विदेशी आक्रमणकारी भी नहीं, फिर भी अपने ही देश में हमारी बेटियां सुरक्षित नहीं है। दो बेटियों की मां हूं, हर वक्त डर बना रहता है। हर वक्त दिमाग में बस एक ख्याल होता है कि बच्ची सुरक्षित है कि नहीं? स्कूल की बस ज़रा सा लेट हो जाए तो टेंशन से दिमाग फटने लगता है।  बच्चा स्कूल जाने से पहले रोने लगे या स्कूल जाने से मना करें तो घबराहट होती है कि कहीं कुछ उल्टा सीधा तो नहीं हुआ उसके साथ। 

परिवारों को, माँओ को और इन बच्चियों को इस दरिंदगी से यदि बचा नहीं सकते तो वह कानून मत बनाइए जहां उन्हें पैदा करने के बाद हम जैसे लोग तिल तिल चिंता में घुलते रहे। कोई फायदा नहीं ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ जैसे जुमलों का. कैसे पढ़ाएं बेटी और किस-किस से बचाएं उस बेटी को? जब पुलिस और सरकार के नुमाइंदे खुद ही हैवान बन जाए और छोटी-छोटी बच्चियों के इन कातिलों को सजा ना मिले? कोई फायदा नहीं किसी विकास का…  अगर इसी तरह से बच्चियों के साथ हैवानियत होती है !!

 

मैं एक ऐसी मां हूं जिसे कभी बेटे की चाहत नहीं रही, आपको पता है जब मेरी छोटी बेटी होने को थी , वो दिसंबर 2012 था और निर्भया के साथ हैवानियत की हर हद पार हो चुकी थी। पहली बार मुझे लगा थाकि  एक बेटी पहले से है, उसको ही बचा पाऊं तो बहुत होगा और जब दूसरी बेटी पैदा हुई तब तक डर मन में घर कर चुका था। 

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बेटियों को कोख में मर जाने दीजिए साहब , नहीं तो कोई उन्हें कैद करके हफ्तों उनके साथ न जाने किस किस्म की बदला ले और क्या हश्र करें उन फूल सी बच्चिओं का ? मुझे नहीं चाहिए रोजगार अब , मैं रह लूंगी घर के अंदर बिना नौकरी के, कम सुविधाओं के साथ। लेकिन बेटियों के लिए जो यह डर है, ये धीरे-धीरे शायद मुझे डिप्रेस कर रहा है या पागल कर रहा है…  इससे बचा सकते हैं तो प्लीज़ कोशिश करिए। 

हर राज्य का चुनाव जीतकर आप शायद भारत की सबसे बड़ी पार्टी बन गए हो, लेकिन आम हिंदुस्तानी,आम वोटर जिसने आपको 2014 में चुना था, उसका दिल और दिमाग अब कुछ समझने को राजी नहीं है। राजनीति कूटनीति हम नहीं समझते , हम आम लोग हैं। हम अपनी सुरक्षा और अपनी जिंदगी को लेकर परेशान है , उन्हीं परेशानियों को दूर करने के लिए आप को चुना है। अभी भी कुछ वक्त है कोशिश कर लीजिए साहब , दोबारा पता नहीं आपकी सरकार आए या ना आए…

और किसी से तो उम्मीद थी नहीं, इसीलिए आप को सौंपा था यह देश। अब कहां जाएंगे, क्या करेंगे हम लोग ? 4 साल में शायद देश साफ ना हुआ हो… शायद महंगाई कम ना हुई हो.. पर आप कहते हैं कि  भ्रष्टाचार कम हुआ है? कानून सख्त कर दीजिए और इन बलात्कारियों को ऐतिहासिक सजा दीजिए.. ताकि अगली बार किसी बच्ची को छूने से पहले इनके हाथ कांपे, लेकिन ऐसा ना हो कि किसी पार्टी का झंडा अपनी गाड़ी पर लगा देने से ये दरिंदे हर जुर्म करके बच जाएंगे! ये तो सरकार के साथ झंडे बदलते हैं , इनकी फितरत नहीं बदलती है साहब! 

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कुछ कीजिए साहब , कुछ कीजिए। कश्मीर से सासाराम तक और उन्नाव से ऊटी तक हर बेटी खतरे में है। FDI बाद में ले आइयेगा पहले इन दरिंदों को मौत के घाट उतारने का इंतज़ाम कीजिये वरना मरने दीजिए बच्चियों को कोख में , ऐसी दुनिया में आकर क्या करेंगी जहां उनके साथ दरिंदगी हो!

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